डॉ. निकोलस मावृदिज़

AHP with Dr. Nikolaos Mavridis

डॉ. निकोलस मावृदिज़ इंटरैक्टिव रोबोट एण्ड मीडिया लैबोरेटरी (IRML) के संस्थापक तथा निदेशक हैं जहां इन्होने “FaceBots” एवँ “Ibn Sina” का आविष्कार किया है | उन्होंने कल शाम सात बजे संपन्न हुए अपोजी इनोवेटर्ज़ प्रोग्राम में अपने आविष्कारों के बारे में बताया | प्रस्तुत है उनसे हुई हमारी बातचीत के कुछ अंश :

ए.एच.पी. : आपने दुनिया भर के कॉलेजों में व्याख्यान दिए हैं | आपका अभी तक बिट्स का अनुभव कैसा रहा ?

निकोलस : मुझे यहाँ का शांत वातावरण पसंद आ रहा है व सभी इमारतें खासकर सरस्वती मंदिर बहुत अच्छे लगे | विशेष बात यह है कि यहाँ कुछ भी बढ़ा-चढ़ाकर नहीं दिखाया गया है | सब कुछ काफी वास्तविक है |

ए.एच.पी. : आपने रोबोटिक्स के क्षेत्र में आने का मन कैसे बनाया? आपके प्रेरणा स्त्रोत कौन थे ?

निकोलस : मुझे बचपन से ही यह जानने का शौक था कि सभी यन्त्र काम कैसे करते हैं | अपनी इसी जिज्ञासा को पूरित करने के लिए मैंने बचपन में अपना पिआनो भी तोड़ दिया था | मुझे आविष्कारों में काफी दिलचस्पी थी | हर चीज़ की काम करने की पद्धति जानने की इच्छा तथा कुछ नया करने के जज़्बे ने मुझे इस क्षेत्र में आने की प्रेरणा दी | पौराणिक गणितज्ञ, इंजीनियर एवं दार्शनिक मेरे प्रेरणा स्त्रोत थे|

ए.एच.पी. : आपने उदघाटन समारोह में अक्युत-4 का प्रदर्शन देखा | अक्युत के बारे में आपके क्या विचार हैं ?

निकोलस : मुझे अक्युत का प्रदर्शन देखकर काफ़ी खुशी हुई | अक्युत टीम की मेहनत तथा लगन से मैं काफ़ी प्रभावित हूँ | उन्होंने बहुत ही अच्छी शुरुआत की है तथा कई अन्तराष्ट्रीय प्रतियोगिताएं में विजय प्राप्त कर न केवल बिट्स का अपितु पूरे भारत का नाम रोशन किया है | लेकिन सफलता की नयी ऊचाईयों को छूने के लिए अब उन्हें ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’, कंप्यूटर विज़न तथा ‘स्पीच रिकग्नीशन’ के क्षेत्र में कदम उठाने चाहिए | अब समय आ गया है कि इसे एक ग्रेजुएट प्रोजेक्ट से एक रिसर्च प्रोजेक्ट में तब्दील कर इसे और बेहतर बनाया जाए |

ए.एच.पी. : फेस्बॉट्स तथा Ibn Sina के बारे में कुछ बताइए |

निकोलस : फेसबॉट एक ऐसा रोबोट है जो चेहरा और आवाज़ पहचान सकता है | साथ ही यह रोबोट आपकी फेसबुक की गतिविधियों व आपने पहले जो भी चैटिंग की है उसके आधार पर व्यावहार करता है| इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य है इंसानों और रोबोट्स के बीच दूरगामी रिश्ते बनाना | Ibn Sina पहला ऐसा रोबोट है जो अरबी भाषा बोलने व इंसानों के हाव भाव पहचानने में सक्षम है |

ए.एच.पी. : बिट्स की जनता के लिए आपका क्या सन्देश है ?

निकोलस : ज़माना बहुत तेज़ी से बदल रहा है | आने वाले समय में इंसान, जानवर व कृत्रिम पात्र एक साथ रहेंगे | साथ ही उन्होंने कहा कि हमें अपने आस पास चल रही चीज़ों के बारे में जिज्ञासु रहना चाहिए व तब तक उस के बारे में सवाल करते रहना चाहिए जब तक हमें उससे बेहतर सवाल न मिल जाये |

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मुख्य अतिथि : प्रभु चावला

Shri Prabhu Chawla with the CoStAAn

ए.एच.पी : इतनी बड़ी संख्या में युवाओं के समक्ष उपस्थिति देकर आपको कैसा लग रहा है?

प्रभु चावला : युवाओं का उत्साह देखकर काफी हर्ष हुआ | यहाँ आने से पूर्व ही मुझे यह पता था कि यहाँ के छात्र अत्यंत होनहार एवं काबिल हैं | अतः यहाँ आकर ज्ञान बांटना मेरा अभिप्राय नहीं था | यहाँ आकर मैंने छात्रों से काफी कुछ सीखा जिन्होंने अपोजी जैसा इतना बड़ा उत्सव आयोजित किया है| थोड़ा बहुत तो सोचा था कि यहाँ आकर क्या-क्या बोलना है किन्तु यहाँ के छात्रों के उत्साह ने मुझे भी एक कॉलेज के युवा जैसा अनुभव करा दिया और शायद इसलिए मैं भी उन्हीं की मस्ती में रम गया |

ए.एच.पी.- जब आप किसी से प्रश्न पूछते हैं तो आप के जहन में क्या होता है? किसी से भी बेबाक प्रश्न करते समय आप क्या सोचते हैं ?

प्रभु चावला : मेरे सभी प्रश्न जनता के ही प्रश्न होते हैं | इसलिए उन्हें करने में कोई हिचकिचाहट नहीं होती | मैं अपने शो में आये व्यक्ति को अतिथि नहीं मानता और मेरा लक्ष्य होता है ‘अटैक’ करना और सत्य को उगलवाना |  एक बार मैंने अपने शो में आये एक व्यक्ति से एक ही प्रश्न तब तक नौ बार पूछा जब तक मैं उसके उत्तर से संतुष्ट नहीं हो गया |

ए.एच.पी : आपने 1980 में 11 वर्ष उपरांत एक लेक्चरर की भूमिका से हटकर पत्रकारिता जगत में कदम रखा | आपको अपने लक्ष्य को पहचानने में क्या 11 वर्ष लग गए?

प्रभु चावला : नहीं ऐसी बात नहीं है | एक पत्रकार के रूप में मैं स्वयं को ज्यादा स्वतंत्र एवं प्रभावशाली महसूस करता हूँ | पत्रकारिता में प्रभुत्व तो रहता ही है, साथ ही आर्थिक रूप से भी काफी सुदृढ़ता आ जाती है जोकि एक लेक्चरर के रूप में नहीं मिल पाती | मैंने पत्रकारिता में कड़ी मेहनत से लोगों से आगे निकल कर अपना मुकाम बनाया और नाम कमाया |

ए.एच.पी. : आपके लौबिस्ट पर क्या विचार हैं?

प्रभु चावला :हाँ, पत्रकारिता जगत में कई लोग नेताओं और बड़े बिजनेस टाइकून्स के प्रभाव में आ जाते हैं | किन्तु मैं इस सन्दर्भ में काफी खुले विचारों वाला हूँ | मैंने एक बड़े बिजनेस हाउस से हुई अपनी सम्पूर्ण वार्ता अपने ब्लॉग पर डाल रखी है | आप मेरे ब्लॉग prabhuchawla.blogspot.com पर इससे सम्बंधित विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं | साथ ही मेरे कॉलम ‘Ask Prabhu’ पर आप अपने प्रश्न पूछ सकते हैं | मैं इसपर रोज़ करीब 20-25 प्रश्नों के जवाब देता हूँ|

ए.एच.पी. : “पेड न्यूज” और ‘मीडिया एथिक्स’ पर आपके क्या विचार हैं ?

प्रभु चावला : हाँ, “पेड न्यूज” का प्रचलन चुनाव के समय ज्यादा होता हैं और मुझे भी इससे सम्बंधित ऑफर आये हैं लेकिन मै कभी इसके प्रभाव में नहीं आया | उच्च पदों पर कार्यरत लोगों के इस सम्बन्ध में क्या विचार हैं, मैं इस बात पर ज्यादा प्रकाश नहीं डाल पाऊंगा | हाँ, आजकल ‘मीडिया एथिक्स’ का लगातार ह्रास हो रहा है| हमारे यहाँ हम इस बात पर ज़ोर देते हैं कि पत्रकार इनका सख्ती से अनुपालन करें किन्तु यह सत्य है कि पूर्ण रूप से हम भी सफल नहीं हैं|

ए.एच.पी : क्या, आज आप के वक्तव्य का केन्द्रीय विषय बॉयफ्रैंड और गर्लफ्रैंड पर आधारित था ?

प्रभु चावला : जब मैंने सारे कॉस्टन के इंट्रो देखे तो सब में एक चीज़ सामान्य थी, वह कि सभी के गर्लफ्रैंड के बारे में ज़िक्र; इसलिए मैंने अपने वक्तव्य में दर्शकों के मूड को देखते हुए इनका बारम्बार प्रयोग किया |

ए.एच.पी. : आप अपनी सफलता का श्रेय किसे देते हैं ?

प्रभु चावला : इसका श्रेय मेरी पत्नी को जाता जो मुझे 35 वर्षों से झेल रही है |

ए.एच.पी. : आप अपोजी में छात्रों को क्या सन्देश देना चाहेंगे ?

प्रभु चावला : मैं बस यही सन्देश देना चाहूँगा कि “सवाल  करो” | जितने ज्यादा आप प्रश्न करेंगे उतना ही ज्यादा नया सीख सकेंगे और ज्ञान वर्धन होगा |

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क्रिस्टोफर जेम्स

AHP Members with Cristopher James

ए.एच.पी. : कनाडा से बिट्स तक की यात्रा कैसी रही ?

जेम्स : कनाडा से बिट्स तक का सफर काफी लंबा था परन्तु सुखद रहा | अपोजी का आमंत्रण मिलने पर काफी हर्ष हुआ और यहाँ अपने शो के लिए काफी उत्साहित हूँ |

ए.एच.पी. : आप इससे पहले भारत में कहाँ-कहाँ शो कर चुके हैं ?

जेम्स : मैं इससे पहले भारत में दिल्ली, IIT गुवाहाटी, जलंधर और NIT त्रिची में शो कर चुका हूँ | मेरा अनुभव शानदार तथा रोमांचक रहा |

ए.एच.पी. : आपको मैजीशियन बनने की प्रेरणा कहाँ से मिली ?

जेम्स : मैं बचपन से ही डेविड कॉपरफील्ड के शो टीवी पर देखा करता था | और एक बार मैंने अपने परिवार के साथ लास वेगस में एक मैजिक शो देखा | उसी से मुझे जादू सीखने की प्रेरणा मिली | मैं 19 साल की उम्र से ही कनाडा में प्रोफ़ेशनल शो कर रहा हूँ और पिछले तीन वर्षों से मैं दूसरे देशों में भी अपनी प्रतिभा दिखा रहा हूँ |

ए.एच.पी. : आपके टेक्नो मैजीशियन होने का क्या राज़ है?

जेम्स : जब मैं भारत के NIT त्रिची के टेक-फेस्ट में शो करने वाला था तब लोगों ने मुझसे कुछ तकनीकी जादू करने की मांग की | तब ही से मैं फ़ेस्ट के अनुरूप ही जादू करने का प्रयास करता हूँ |

ए.एच.पी. : आपने जादू से सम्बंधित दो किताबें व कुछ DVDs  निकाली हैं, उनके बारे में कुछ बताएं ?

जेम्स : मैंने दो किताबें लिखी हैं, ‘मैजिक-ऐज़ आई सी इट’ और ‘ब्लैक डेक’ जो कि एक विशेष तरह के कार्ड्स के लिए ट्रिक बुक है | इस किताब से कोई भी जादू सीख सकता हे |

दो DVDs भी निकाली हैं जिनमें से एक का नाम ‘स्कार्पियन’ है | इनसे आप तरह-तरह की जादू की कलाएँ सीख सकते हैं, बल्कि मेरा आज का शो भी कोई भी कर सकता है, बस सही प्रशिक्षण की ज़रूरत है |

ए.एच.पी. : क्या आप प्राइवेट शो के साथ साथ चैरिटी शो भी करते हैं ?

जेम्स : मैं हर महीने 2 या 3 शो चैरिटी के लिए करता हूँ | दरअसल मेरे कुछ दोस्त चैरिटी कॉन्सर्ट्स कराते हैं | इस तरह मैं भी उनके साथ लग गया | इसके साथ –साथ इन शोज़ से मुझे ज्यादा दर्शकों तक पहुँचने का मौका मिलता है | कभी भी मेरे शो और दर्शकों के बीच पैसे बाधक नहीं बने हैं |

ए.एच.पी. : आप बिट्स में कब तक रहेंगे?

जेम्स : मैं बिट्स में पूरे फ़ेस्ट के दौरान स्ट्रीट मैजिक करूँगा | साथ ही एक इवेंट में जज की भूमिका में भी रहूँगा |

ए.एच.पी. : बिट्स की जनता के लिए आपका क्या सन्देश है ?

जेम्स : मेरा छात्रों के लिए यह सन्देश है कि छात्र ज्यादा से ज्यादा इवेंट्स में भाग लें और फ़ेस्ट का आनंद लें |

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उद्घाटन समारोह- अपोजी 2011

Chinese Sky Lanterns

“जिसके लिए हर शख़्स बेकरार था…

जिस घड़ी का हमें कब से इंतज़ार था |

लफ्ज़ कम पड़ जायेंगे, हम कह न पाएंगे…

कभी न भूलेगा वो लम्हा इतना यादगार था||”

कुछ ऐसी ही शब्दलता मन में अनायास उठती है जब अपोजी 2011 के अद्भुत आगाज़ के वो मनोरम दृश्य आँखों के समक्ष जी उठते हैं| सभी कॉस्टन, डिपार्टमेंट्स, क्लब्स और संघों की कई माह की कड़ी मेहनत और लगनशीलता तब सफल हुई जब 25 मार्च की संध्या को बिट्स पिलानी का ऑडिटोरियम गूँजती तालियों से झूम उठा और आगाज़ हुआ बिट्स के 29वें वार्षिक तकनीकी महोत्सव “अपोजी 2011” का |

हमारे कुछ गुनाहों की सज़ा भी साथ चलती है,

हम अकेले नहीं चलते दवा भी साथ चलती है |”

-प्रभु चावला

उद्घाटन समारोह की शुरुआत सुप्रसिद्ध पत्रकार और संपादक माननीय ‘प्रभु चावला’ के गरिमामयी आगमन से हुई| सभी कॉस्टन एवं आदरणीय ‘रघुरामा सर’ की उपस्थिति में उन्होंने दीप प्रज्वलित कर एक बेहतरीन शाम का आगाज़ किया| प्रेसिडेंट गोविन्दम यादव द्वारा स्वागत के पश्चात प्रभु चावला ने मंच संभाला और कोई व्याख्यान न देते हुए उन्होंने अपने ही अंदाज़ में समस्त जनता से बस कुछ “सीधे” व “सच्चे” सवाल पूछे |

समारोह को आगे बढ़ाते हुए ‘अक्युत-4’ की प्रस्तुति ने समां बाँध दिया| हाँलाकि प्रारंभ में कुछ तकनीकी खा़मियों के कारणवश अक्युत मंच पर प्रस्तुति नहीं दे पाया था परन्तु अंततः जब उसने लोगों के समक्ष आकर अविस्मरणीय करतब दिखाए तो हर चेहरा अवाक् रह गया| तत्पश्चात सभी लोगों को डी-लॉन्स में आमंत्रित किया गया जहाँ सभी ने ‘चायनीज़ लेंटर्न्स’ जलाकर हवा में उड़ाए और बिट्स के आकाश को रोशनी से जगमगा दिया|

अंत में सबका मनोरंजन करने मंच पर आये कनाडा के प्रख्यात तकनीकी जादूगर ‘क्रिस्टोफर जेम्स’ ने अपने शानदार कारनामों से लोगों का दिल जीत लिया| अपने प्रत्येक जादू के लिए उन्होंने दर्शक दीर्घा से छात्र व “सुन्दर” छात्राओं को बुलाया और अत्यंत करीबी से अविश्वसनीय जादूगरी दिखाकर विस्मित कर दिया| समारोह के समापन पर उन्होंने ड्रम्स पर भी अपना जौहर दिखाया और लोगों को थिरकने पर मजबूर कर दिया|

इस प्रकार बिट्स पिलानी के वार्षिक तकनीकी महोत्सव ‘अपोजी-2011’ के 29वें संस्करण का भव्य एवं अलौकिक आगाज़ हुआ जिसके आधार पर अगले चार दिनों में होने वाले शानदार आयोजनों से उम्मीदें और भी पुख्ता हो चुकी हैं|

इस पतवार का दामन ना छोड़ो… अभी डूबी नहीं है ये नाव|

इसे मंजिल मत समझो मेरे यारों.. ये है महज़ एक पड़ाव ||

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प्रेसिडेंट : गोविन्दम यादव

छात्र संघ के अध्यक्ष गोविन्दम यादव ने बताया कि इस वर्ष अपोजी का बजट लगभग 35-40 लाख होगा | उन्होंने बताया कि उद्घाटन समारोह में 300 से भी अधिक चायनीज़ लेंटर्न बिट्स पिलानी के आकाश को रौशन करेंगे| चाइनीज़ विशिंग लैंटर्न बिट्सियनस् को भी उपलब्ध करवाए जाएँगे | इसके लिए उन्हें स्टूडेंट यूनियन की वेबसाइट पर रजिस्टर करना होगा | कुछ लैंटर्न विभिन्न क्लब एवं डिपार्टमेंन्ट को भी दिए जाएँगे | इस वर्ष आर्मागैडन नामक गेमिंग प्रतियोगिता भी आयोजित की जा रही है जिसका आयोजन ज़पैक एवं एलियन-वेयर कर रहे हैं | एक अन्य इवेंट – इग्नाईट में छात्रों को मनोवांछित विषय पर निर्णायकों एवं अन्य छात्रों के सम्मुख प्रस्तुति देनी होगी| गोविन्दम ने सभी छात्रों से अनुरोध किया है कि सभी कार्यक्रमों में अधिक से अधिक भाग लें एवं अपनी प्रतिभा को सभी के सामने प्रस्तुत करें |

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महासचिव : गौतम प्रसाद

छात्र संघ के महासचिव ‘गौतम प्रसाद’ ने बताया कि इस वर्ष का उद्घाटन समारोह अत्यंत भव्य और अविस्मरणीय होगा | अपोजी 2011 का उद्घाटन ‘सीधी बात’ के प्रसिद्ध एंकर “प्रभु चावला” करेंगे | जहाँ 300 से भी अधिक चायनीज़ लेंटर्न बिट्स-पिलानी के आकाश को रौशन करेंगे वहीं ‘अक्यूत-4’ की पहली झलक और ‘टेक्नो जादूगर’ क्रिस्टोफेर जेम्स का अद्भुत कार्यक्रम अपोजी के उद्घाटन समारोह की शोभा बढ़ाएंगे | हालांकि इस वर्ष उन्हें कुछ हद तक आर्थिक मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है जिनके समाधान हेतु वे इस अपोजी में कुछ विशेष क्षेत्रों पर अधिक ध्यान दे रहे हैं ताकि न्यूनतम खर्च पर अधिकतम गुणवत्ता प्राप्त हो सके | उन्होंने बताया कि इस आयोजन को कामयाब बनाने हेतु सभी असॉक, क्लब एवं डिपार्टमेंट्स ने अपना सर्वस्व दिया है |

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बार कैम्प

बिट्स पिलानी द्वारा आयोजित भव्य वार्षिक तकनीकी महोत्सव ‘अपोजी-2011’ दस्तक देने के लिए देहलीज़ पर खड़ा है और इस वर्ष के विभिन्न आयोजनों पर नज़र डालें तो उम्मीदें और उत्साह दोनों अपनी चरमसीमा पर पहुँच जायेंगे | इन्हीं रोचक आयोजनों में से एक है ‘बार कैम्प’-एक अत्यंत नवीन सोच की उपज |

Are you attending it??

ए.सी.एम. द्वारा आयोजित यह पूर्णतः नवीन शैली का कार्यक्रम बिट्स में अपनी तरह का पहला आयोजन होगा | ए.सी.एम. के संयोजक ‘मयंक अभिषेक’ के अनुसार यह एक ऐसा आयोजन है जिसे न तो पूर्णतः लेक्चर कहा जा सकता है न ही कॉन्फ्रेंस ; अपितु दोनों का समावेश | मयंक ने इस विषय को विस्तृत करते हुए बताया कि आमतौर पर किसी भी कॉन्फ्रेंस के आयोजन से पहले ही व्यक्ति और विषय का चयन कर लिया जाता है, परन्तु ‘बार कैम्प’ में चीज़ें थोड़ी अलग होंगी | इसमें अन्य महाविद्यालयों से शिरकत कर रहे प्रतिभागी ही इस आयोजन के संचालक, वक्ता और श्रोता होंगे | दूसरे शब्दों में कहें तो यह आयोजन एक ऐसा मंच प्रदान करेगा जहाँ विभिन्न क्षेत्रों में रूचि रखने वाले प्रतिभागी एक दूसरे के साथ अपने ज्ञान का आदान-प्रदान करेंगे | इसमें अनेक विषयों पर चर्चाएँ होंगी, वाद-विवाद होगा, प्रस्तुतियाँ होंगी और नवीन विचारों को पनपने का मौका मिलेगा | ए.सी.एम. के संयोजक मयंक ने हमें बताया कि इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए प्रतिभागियों में ज़रुरी है जागरूकता, जिज्ञासु प्रवृत्ति तथा नवीन विचारों को लोगों के समक्ष प्रस्तुत करने की कला | यह एक ऐसा अवसर है जब हर व्यक्ति बहुत कुछ नया सीख और सिखा सकता है |

रविवार, 27 मार्च को होने वाले इस कार्यक्रम के लिए प्रतिभागी ऑनलाईन रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं, हांलाकि उसी दिन आयोजन स्थल पर भी रजिस्ट्रेशन होते रहेंगे | यूँ तो विषय उसी वक्त चुने जायेंगे परन्तु प्रतिभागियों की सहायता हेतु ए.सी.एम. ने अपने वेब पेज पर कुछ विषय लिखे हैं जैसे “इन्टरनेट तकनीक”, “मीडिया”, “व्यापार और कला” आदि जिनसे प्रतिभागियों को एक अनुमान लग जाये कि किस प्रकार के विषय इस कार्यक्रम में प्रस्तुत किये जा सकते हैं| इसके अतिरिक्त और अधिक जानकारियों के लिए प्रतिभागी ‘फेसबुक’, ’ट्विटर’ और ‘विकीपीडिया’ पर ‘बार कैम्प’ की वेबसाइट्स देख सकते हैं|
अतः यह तो सुनिश्चित है कि ‘बार कैम्प’ जैसे अद्वितीय और अनूठे आयोजन की सफलता से अपोजी-2011 एक नए और बेहतर स्तर पर विराजमान हो जायेगा| अब इंतज़ार है तो बस उस घड़ी का जब यह अतिअपेक्षित महोत्सव प्रारंभ होगा और कामयाबी के नए आयाम स्थापित करेगा|

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अपोजी की तैयारियाँ

अपोजी की तैयारियों के सिलसिले में हमारी बात हुई डिपार्टमेंट ऑफ कन्ट्रोल्ज़ की कॅास्टन – ज़ारा अहमद  से |

कन्ट्रोल्ज़ की संयोजिका ज़ारा अहमद ने बताया कि इस अपोजी अब तक करीब 5500 प्रतियोगियों ने वेबसाईट पर रजिस्टर किया है जिनमें से 1000-1100 प्रतिभागी अपोजी में शिरकत करने कैम्पस आयेंगे | ‘अपोजी इनोवेटर्स प्रोग्राम’ के ज़रिये बिट्स की जनता को कई मशहूर हस्तियों से रूबरू होने का मौका मिलेगा | ‘धिति’,  ’ACM-ICPC’, माइक्रो-माउस और ‘अप इन द एयर’ जैसे इवेंट्स लोगों का ध्यान आकर्षित करेंगे | साथ ही पहली बार आयोजित “बार कैम्प” लोगों को अपने विचार रखने का मंच प्रदान करेगा | इसके अलावा ‘इंडस्ट्रियल प्रॉब्लम स्टेटमेंट्स’ के तहत छात्रों को विभिन्न औद्योगिक समस्याओं का समाधान निकालने का अवसर मिलेगा जिसके विजेता को कम्पनी की तरफ से इनामी राशि मिलेगी| इस अपोजी वर्कशॉप्स केवल कैम्पस में ही नहीं बल्कि अन्य कॉलेजों में भी आयोजित किये जा रहे है जो कि जनवरी से शुरू हो गए हैं | कन्ट्रोल्ज़ में कुल 40 सदस्य हैं व उनका बजट करीब 18000 रूपये है |
ज़ारा ने यह विश्वास दिलाया कि तकनीक एवं मनोरंजन का समावेश अपोजी 2011 , सबके लिए कुछ न कुछ लेकर आ रहा हैं |

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प्री अपोजी – ऑनलाइन इवेंट

Don't just be the reader... Be the CREATOR.. !!!

For rules & resources vist - http://www.bits-apogee.org/2011/#Online_Events/The_Daily_Redesigned_/

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प्री अपोजी – ऑनलाइन इवेंट

"Bring the "hidden" out of your world, and present in the form of a video.

Whether it’s an incident that should see the light of the day or a revelation waiting to be bestowed onto the people, you have to devise an idea, be it in form of live reporting or an interview, a documentary or a sting operation and present it in the most eye opening and eye catching form.

Visit the Event page – http://www.bits-apogee.org/2011/#Online_Events/Camera_Speaks_/

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